आशा और निराशा के खेल में हम।'s image
Poetry1 min read

आशा और निराशा के खेल में हम।

Manoj AgarwalManoj Agarwal September 15, 2022
Share0 Bookmarks 16 Reads0 Likes

आशा और निराशा के खेल में हम।

आशा और निराशा के खेल में हम।


हासिल है जोउसे भुल जाते हैं हम। 

आशा और निराशा के खेल में हम।


चाहतेंबुरी नहीं हैपर आख़िर चाहतें ही तो हैं। 

चाहतेंबुरी नहीं हैपर आख़िर चाहतें ही तो हैं। 

अभी हासिल कहाँफिर भी नासमझ हम।

हासिल है जोउसे भुल जाते हैं हम। 


आशा और निराशा के खेल में हम।


 नुक्कड़ कविमनोज अग्रवाल

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts