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फिर वही शाम

लौट आई है

फिर इसी बहाने

तेरी याद आई है


वक्त क्यों खुद को

दोहराया करता है

दिन गुजरा नहीं कि

वही तन्हाई है।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित

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