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क्यों भाग रहा है बरसों से

बैठ कभी तो मेरे पास

क्या चाह बाकी मन में तेरे

शेष रही कौन सी आस


पाकर भी मिटी न तृष्णा

पी कर भी न मिटी प्यास

तृष्णा से तृष्णा को मारेंगे

तू बैठ कभी तो मेरे पास ।


मं शर्मा( रज़ा)

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