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चमन में बहार हो

कि उजड़ा दयार हो

वक्त की आँधियों का

आना जाना थमता नहीं


खुशियों का त्यौहार हो

कि उजड़ी मजार हो

रवायतों का सिलसिला

कभी भी रूकता नहीं।


मं शर्मा (रज़ा)

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