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सीलन इन दीवारों की

धीरे धीरे चली गई

जाते जाते पीछे अपने

गहरे निशान छोड़ गई


जीवन की कुछ यादें भी

वक्त के साथ बिसर गईं

फिर भी इस दिल में एक

मीठी कसक रह गई ।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित


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