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जाने कौन सिसका है भीतर

किसने किसको रूलाया है

कैसे इसका निदान करूँ एक

खौफ जीवन में समाया है ।


मन के अंधेरे छलके बाहर

जितना इन्हें छिपाया है

ये पाप पुण्य की छाया है

हर शख्स लगे एक साया ।


मं शर्मा (रज़ा)

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