समय's image
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उठने लगी उंगलियां

दिल बेकरार था

अपने फैसलों पे

ना रहा ऐतबार था


समय ने बीत कर

मुझको जता दिया

ठहरता नहीं कहीं वो

बढ़ता चला गया।


मं शर्मा( रज़ा)

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