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साल दर साल

तेरा ही ख्याल

मन को मेरे

सालता ही रहा


मेरा समर्पण

तन मन अर्पण

तेरे वादे से

हारता ही रहा


जीने की आशा

दीए सी अभिलाषा

मैं मन मंदिर में

बालता ही रहा।



मं शर्मा (रज़ा)

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