सच झूठ's image
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किसी चितेरे की कल्पना है

किसी मदारी का तमाशा है

धूप छाँव सा जीवन अपना

सच की झूठी आशा है

ये कैसी चाहत है जीवन की

जिसकी न कोई परिभाषा है।

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