रिक्तता's image
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खुशियों सांझे की थी

मिल कर बाँट ली

दुख नितांत निजी था

मेरे संग हो लिया


शब्दों के अकाल में

मौन से वार्तालाप में

तिनका तिनका रोज़ में

रिक्तता से भर गया।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित

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