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दिलों में रह गए दफन कुछ राज़ ऐसे

राह भटक जाए कोई मुसाफिर जैसे

तेरे दिल में भी कुछ खटकता होगा

मुझे कसकती हैं कई यादें जैसे ।


मं शर्मा (रज़ा)


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