प्रेम बंधन's image
Share0 Bookmarks 14 Reads0 Likes

कैसी ये उलझन

कैसा भ्रम है

दुविधाओं में घिरा हुआ

समस्त जीवन है


अपनों के बीच में

सुविधाओं की अनबन है

प्रेम लाचार हुआ

ये कैसा प्रेम बंधन है।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts