नमी's image
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आँखों में नमी सूख गई

दर्द का अंदाज़ा न हुआ

ज़हन में कितनी नमी थी

मुस्कुराहटों ने छिपा लिया


दरिया सिमट जाते हैं कभी

सावन भी सूख जाते हैं

दर्द की फसलें मरती नहीं

क्या हुआ कुआँ सूख गया।


मं शर्मा( रज़ा)

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