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किस्मत की लकीरें हैं

उसने उकेरी हैं

मुठ्ठियों में बंद यूँ

सबकी तकदीरें हैं


इनमें उलझा न कर

कर्म को भुलाया न कर

जो तेरे वश में नहीं

उसको सोचा न कर।


मं शर्मा

#स्वरचित

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