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एहसासों की माला जैसे

भावनाओं से ओतप्रोत

कुछ खत मैंने संजो रखे हैं

पिता गए थे जिनको छोड़


ह्रदयस्पर्शी बातें हैं इनमें

कुछ जीवन के उत्तम मंत्र

गीता का सा सार लगें मुझे

जब मन मेरा हो जाए अशांत ।



मं शर्मा (रज़ा)

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