कश्ती's image
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मंझधार में नैया है

पतवार चला रहा हूँ

डूबने के खौफ में

डूबता जा रहा हूँ


खैरात की जिंदगी का

मोल चुका रहा हूँ

किश्तों में मर रहा हूँ

किश्तों में जी रहा हूँ ।


मं शर्मा( रज़ा)



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