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हाथों में हाथ था

जन्मों का साथ था

संग जीने के वादे थे

एक दूजे पर मरते थे


फिर भी खाली हाथ रहे

खुशियों से मोहताज रहे

कसमे वादे हवा हुए

सपनों के महल ढह गए। 


मं शर्मा (रज़ा)

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