कल तक's image
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कल_तक जो आज था

आज क्यों वैसा नहीं है

कल तक सुनहरी भोर थी

आज वैसी रही नहीं है


किसने ये बदलाव किया

किसने की तब्दीलियां

शांत जीवन सागर की

लहरें किनारे तोड़ गई हैं ।


मं शर्मा (रज़ा) 9

#स्वरचित

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