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कभी यूँ भी हो

Manju SharmaManju Sharma December 5, 2022
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ध्यान धरूँ नित

राह निहारूँ

छिन छिन गिन

दिवस बिताऊँ


कभी यूँ भी हो

तुम चले आओ

निरख निरख तुम्हें

प्राण निसारूँ।



मं शर्मा (रज़ा)

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