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उजाड़ गया घर कितनों का

बिखर गया महल सपनों का

झोंका समय का एक झोंका

किसी के रोके से कब रूका

सुख दुख की पतवार थामकर

फिर भी चलती जीवन नौका।


मं शर्मा (रज़ा)

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