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गुबार सा एक

दिल से उठा

दिल ही में

रह गया


तूफान बनके

उमड़ता है जबभी

मैं मन में कई बाँध

खड़े कर लेता हूँ


टूट गए सभी बाँध

जो एक दिन

सोच सोच कर ही

सिहर उठता हूँ।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित

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