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खामोश वादियों में

गूँजती सी घाटियाँ

जाती हुई बहार में

घहराती सी घटाएँ

कह रही हैं रात से

अब चाँदनी लुटाएं

भोर तक जागती रहो

सपने दिखाती रहो

नींद के मीठे झूले में

सबको सुलाती रहो

उषा की लाली संग

तुम्हारी विदाई हो ।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित

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