घर की याद's image
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दिवस ने कब चाहा था ढल जाना

वो तो सूरज को घर की याद आई थी

फिर चाँद आ गया चाँदनी लेकर

पीछे पीछे तारों की बारात आई थी।


मं शर्मा (रज़ा)

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