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घनन घनन

बरस रहे घन

मन नाच रहा

होकर मगन


कोयल कूकें

नाच रहे मोर

झूले की पींगें

खींचें अपनी ओर


ठंडी फुहार

गाये मल्हार

रिमझिम बौछार

आनंद का त्यौहार। 


मं शर्मा( रज़ा)

#स्वरचित

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