दिन रात's image
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तुम मेरे बिन अधूरी

मैं तुम बिन अधूरा

दिन रात के नाते सा

तेरा मेरा रिश्ता है


तेरे उजाले मेरे अंधेरे

एक-दूजे के पूरक हैं

हम दोनों के होने का

और न कोई औचित्य है।


मं शर्मा (रज़ा)

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