आशियाना's image
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वक्त की आँधियों ने

उजाड़ा है घर मेरा

इसी शहर में था कभी

आशियाना मेरा


उठ गया बसेरा

कुछ इस तरह यहाँ से

बियाबां में खड़ा हो

कोई पेड़ अकेला ।


मं शर्मा

##स्वरचित

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