आसमान's image
Share0 Bookmarks 13 Reads0 Likes

उन्मुक्त गगन में उड़ने वाले

हम पंछी थे भोले भाले

क्यों हम पर तू डाले ताले

ऐ इंसान कपटी मन वाले


बंधन हमको कभी न भाए

इसीलिए पंछी जीवन पाए

बस आज़ादी से उड़ना चाहें

थोड़ा सा आसमान चाहें।


मं शर्मा( रज़ा)


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts