अंदाजा's image
Share0 Bookmarks 14 Reads0 Likes

चीख चीख कर रोष बयां करती रही

लहरों के आवेश का अंदाजा न हुआ

चीर कर किनारों को जब बहा ले गई

तब भी अपने ही दर्द का मातम हुआ।



मं शर्मा (रज़ा)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts