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अक्स था मेरा

आईना नहीं था

टूटने वालों में

मैं नहीं था


चोट क्यों दी

यूँ ही बिखर जाता

शीशे सा दिल मेरा

शर्म से मर जाता।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित

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