अहसान's image
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मन मेरा है

ख्याल तुम्हारा क्यों है

घर मेरा है

सामान तुम्हारा क्यों है


ज़ख्म मेरे हैं

अहसान तुम्हारा क्यों है

मेरी मर्ज़ी पर

फरमान तुम्हारा क्यों है।


मं शर्मा (रज़ा)

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