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मैं नादान उद्दंड अभिमानी

तेरी महिमा मैंनें न जानी

मैं याचक कर जोड़े खड़ा हूँ

तुम सा कहाँ दूजा कोई दानी


तेरी क्षमा का प्रार्थी हूँ मैं

बना दे तू मेरी जिंदगानी

तेरी दया के गुण गाएं सब

सुन कर तेरी मेरी कहानी ।


मं शर्मा (रज़ा)

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