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Romantic PoetryPoetry1 min read

अबकी बार लौटा तो

Manish YadavManish Yadav December 15, 2022
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अबकी बार लौटा तो


बृहत्तर लौटूँगा


चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं


कमर में बाँधे लोहे की पूँछे नहीं


जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को


तरेर कर न देखूँगा उन्हें


भूखी शेर-आँखों से


अबकी अगर लौटा तो


मनुष्यतर लौटूँगा


घर से निकलते


सड़कों पर चलते


बसों पर चढ़ते


ट्रेनें पकड़ते


जगह बेजगह कुचला पड़ा


पिद्दी-सा जानवर नहीं


अगर बचा रहा तो


कृतज्ञतर लौटूँगा


अबकी बार लौटा तो


हताहत नहीं


सबके हिताहित को सोचता


पूर्णतर लौटूँगा


- कुंवर नारायण

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