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मैंने कब कहा मुझे सब बता,

फ़क़त इस उदासी का सबब बता


यूं इशारों से न दिल बहला,

किसी एक का तो मतलब बता


क्या नशा है जो उतरता नहीं,

किस शय की है ये तलब बता 


मैं किसी गुमां में क्यों रहूं,

कौन हूँ तेरी आखिर , अब बता


-ममता पंडित

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