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हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं....

Mamta PanditMamta Pandit October 22, 2021
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हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं....

अगर आपको शाहरुख के अभिनय से ज्यादा उनके साथ लगे हुए 'खान' में रुचि है तो यह पोस्ट मत पढ़िए....

सिनेमा मेरा पहला प्यार है , मैं सिनेमा देखते हुए साहित्य की ओर मुड़ी हूँ। कविताओं से अधिक मैंने फ़िल्म समीक्षाएं लिखीं हैं ।

हमारी पीढ़ी जो नब्बे के दशक में जवान हुई है उसकी जिंदगी शाहरुख, सलमान और आमिर से अछूती नहीं रह सकती । इन सब में भी शाहरुख की दीवानगी का एक अलग आलम है l अपनी बात करूं तो 'दिल तो पागल है' मैंने ब्लैक में टिकिट लेकर देखी थी । 'दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे','कुछ कुछ होता है','कभी ख़ुशी कभी गम' और वीर ज़ारा कितनी बार देखी इसका कोई हिसाब नहीं है।
बरसों पहले जब दिव्या भारती ने शाहरुख खान लिए 'दिवाना तेरा नाम रख दिया' गाया , तो फ़िल्म की प्रदर्शन के साथ ही ये गीत  देश की हर जवां लड़की के दिल की आवाज़ बन गया ।
ऐसा नहीं है कि ये दीवानगी अचानक हुई ,फ़ौजी और सर्कस जैसे धारावाहिकों के साथ शाहरुख घर घर में लोकप्रिय हो चुके थे । अपनी बात करूं मैं स्वयं उनके फ़ौजी से क़िरदार से इतनी प्रभावित थी की आज  मैं एक सैन्य पत्नी हूँ ।
दीवाना, राजू बन गया जेंटलमैन, कभी हां कभी ना ,करण-अर्जुन जैसे नायक प्रधान फिल्मों के साथ साथ उंस दौर में उन्होंने एक नई शुरुवात की , फिल्मों में खलनायक के किरदार की एक स्थापित नायक की छवि के लिए इस तरह के किरदार खतरनाक साबित हो सकते थे लेकिन उन्होंने यह जोखिम उठाया। डर और बाज़ीगर की अपार सफलता नहीं यह साबित कर दिया की जनता शाहरुख को हर रूप में प्यार और स्वीकार करती है ।
सन 1995 में आई उनकी फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे नहीं तो कहानी ही बदल दी ।  उस दौर के सभी प्रेमियों के लिए 'राज' एक चुनौती हो गये क्योंकि हर लड़की अपने प्रेमी में इस फ़िल्म के राज को ढूंढने लगी । उसके बाद उनकी कुछ फिल्में नहीं चली लेकिन  दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे  की अप्रत्याशित सफलता के बाद शाहरुख बॉलीवुड के बेताज बादशाह बन गए । सफल-असफल फिल्मों का सिलसिला चलता रहा । मोहब्बते, कल हो न हो, मैं हूँ न और वीर -ज़ारा जैसी रोमांटिक फिल्मों के साथ उन्होंने अपने दर्शकों को बांधे रखा।
अगले वर्ष वे उन्हें इन्डस्ट्री में तीस साल हो जाएंगे । इस तीस वर्षों में फैले कैरियर की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शाहरुख ने अपनी व्यावसायिक और निजी जिंदगी में बहुत अच्छा तालमेल बना कर रखा । मुझे याद नहीं कि छूट-पुट खबरों के अलावा उनसे जुड़ी हुई कोई बहुत बड़ी विवादित खबर मीडिया में आई हो। हमेशा बहुत ही सभ्य सहज और सरल सरल रहे । एक अभिनेता के साथ साथ एक जिम्मेदार पति और पिता की भूमिका भी उतनी ही शिद्दत से निभाते रहे। वे केईं छोटे कलाकारों को प्रोत्साहित करते रहे । हर ज़रूरत मंद कि हर संभव मदद करते दिखे । संक्षेप में कहा जाए तो उनकी ये सफलता कभी उनके सर पर नहीं चढ़ी ।

हाल हाल ही में हुए घटनाक्रम के बाद उनके पुत्र आर्यन खान का एक ड्रग केस में पकड़े जाना व उसकी जमानत याचिका दो बार खारिज हो जाने के बाद शाहरुख निश्चित ही बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे होंगे । बात साफ तौर पर या नजर आ रहा है की आर्यन को शाहरुख के नाम और शोहरत की कीमत चुकानी पड़ रही है और साथ ही शायद एक संप्रदाय विशेष से आने की भी। क्न्व्व
यह कैसी न्याय व्यवस्था  है कजहां कुछ किसानों पर गाड़ी चलाने वाले नेता के पुत्र का पुलिस तीन दिनों तक इंतजार करती है और वहीं  एक छोटे से ड्रग केस में मेअभिनेता के पुत्र को तीसरी बार भी जमानत नहीं मिलती। क्योंकि मामला अदालत में है इसलिये इस पर कुछ और कहना ठीक नहीं लेकिन फिर भी इतना तो हम शाहरुख़ से कह ही सकते हैं कि ' हम आपके साथ हैं' और  हमें यक़ीन है कि हर बार की तरह एक बाज़ीगर की तरह  आप ये बाज़ी भी जीत लेंगे ।

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