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रिक्त था अतिरिक्त ही रहा

mail.sunil3sharmamail.sunil3sharma May 16, 2022
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#न जाने तुम किस सोच मे हो

 मै तो अपनी ही सोच मे रहा।।

#सुन के भी अनसुनी की गईं

 कहा तो बस कहता ही रहा।।

#बस इक जवाब के वास्ते

 न यहाँ का रहा न वहाँ का रहा।।

#मुबारक़ मिली मंजिल जिसे

 मै कारवां था कारवां ही रहा।।

#महफ़िल तेरी फिर भी बेदख़ल

 कोने मे खड़ा बस खड़ा ही रहा।।

#थे हम भी खिलाड़ियों मे शामिल

 रिक्त था पर अतिरिक्त ही रहा।।

#कहानी तेरी कौन सुने सुनाए

 लिखना शुरू की लिखता ही रहा।।

#बीमारी का अंजाम मौत है शायद

 मै शेरों मे था शेरों मे ही रहा।।

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