ख़्वाब's image
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#नींद अब आती नहीं।

 ख़्वाब अब देखूं कैसे।।

#इक बार ही तो आई थी।

 वही ख़्वाब अब देखूँ कैसे।।

#शेर होता तो लिख लेता।

 ख़्वाब को अब लिखूं कैसे।

#ख़्वाब मे जिए ख़्वाब मे मरे

 बेदख़ल ही नहीं न जाने कैसे कैसे।।

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