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#न अपना था न अपना रहा।

 हिम्मत नहीं फ़िर भी कह रहा।।

#संभाल के रखा था जिसे।

 लगता है अब ख़ुद का न रहा।।

#सोचा था वसीयत करुँगा अपनी।

 तख़्त खोला तो बस देखता रहा।।

# गर कोई हो तो जरूर बताना।

शेर बेचने हैं घर का खर्चा नहीं चल रहा।।

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