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आज सुबह
खबर पढ़ी अखबार में ।
चाय पीते पीते
बदल गई तकरार में ।
गरीबी बहुत थी
एक प्रवासी परिवार में ।
चार पैसे कमाने को
गाँव छोड़ आये बिहार में ।
धान रोपाई चल रही है
इस गर्मी की फुहार में ।
महेश और उसकी पत्नी
बच्चे के लाड़ प्यार में ।
खेत मे ही ले चल दिये
अपने दिल के दुलार में ।
सब मजदूरों के संग
काम कर रहे थे क्यार में ।
पेड़ तले बच्चा सोया था
ठंडी ठंडी बयार में
अचानक एक कुत्ता आया
बच्चे को उठा मारा दीवार में ।
देख दृश्य सहमे सब
माता खो गई चीत्कार में ।
बाप को अब भी होश नही
उलझा पड़ा उपचार में।
मैं पढ़ कर सोच रहा
कैसे पड़े धिक्कार में ।
उस बच्चे का कातिल कौन
वो जो है सरकार में ।
सदियां बीत गई इनकी
सोमवार से रविवार में ।
हालात बदल न इनके
कहाँ कमी विचार में ।
मैं आप या हम सब
तड़प रहे मन के कारागार में
आखिर क्यों मजदूर
मजदूर रहा इस व्यापार में ।

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