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।। मेरी राहे तरसती रहे ।।

mahiram901mahiram901 November 14, 2022
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मैं राहे अपनी सजाता रहा ,

उनकी राहे थी हजार ।

ये धोखा नहीं दिल की तसल्ली मात्र थी बस बोल देते एक बार ।

हम ही रास्ता बदल लेते ,

प्रियतम को नहीं देते तकलीफ हर बार ।

जब दिल ही प्रियतम का नहीं पिघला तो क्यों-किसे मनाऊ बार बार ।

मेरी राहे तरसती रहे, तड़पता मन ,बेचैनी की आह से एक सवाल हम की अदा के है गुनाहगार ।।।

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