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सूरज और मैं

Mahima ThakurMahima Thakur April 9, 2022
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सूरज और 'मैं'

कितने समान हैं...

कभी न बुझने वाली प्यास है अंदर


सूरज जल को प्यासा

समुद्र से पानी लेता है

कैवल्य स्वर का प्यासा 'मैं'

मोक्ष की वाणी सुनता है।


'मैं ' खूब समझता है

सूर्य की तृष्णा

इसलिए स्वयं बहा देता है नेत्रनीर 

और तैयार है अर्पण को

जो अश्रु भी स्वयं का नहीं।


'मैं ' अजर अनंत प्रकाश

सूरज सा चमकीला तेज़

मृत्यु, जन्म का उद्देश्य!

ज्ञान हुआ तो पाए मोक्ष

अन्यथा प्रकृति में ही द्वेष!!


_महिमा ठाकुर

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