मोती और 'मैं ''s image
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बिखरे हुए को समेट लेना

उतना सहज नहीं...


सुंदर समतल सतह पर

बिखरे हुए मोती

उठाए तो गए, लेकिन नहीं उठे गए

अपनी रफ्तार पकड़े, सब ढह गए


और 'मैं' ?

रोकने की कोशिश का छल करता

वास्तव में दृष्टा बनकर

सब देखता रहा....

और दोषारोपण किया सतह पर


ऊबड़ -खाबड़ जमीन भी

'मैं ' को उपयुक्त ना लगी

इसलिए कि

बिखरे हुए मोतियों को

जमीं की बीहड़ता ने

निगल लिया...


'मैं ' वही मोती है जो

अन्य मोतियों सहित

धागा में पिरोए जाने पर

माला बन शोभा पाता है

लेकिन धागा स्वयं पर

जोर लगते ही अलग कर देता है

अपने दोनो छोरों को

और बेपरवाह बन मोतियों का

संग छोड़ देता है


मोती रूपी 'मैं ' भ्रमित है

प्रकृति के षडयंत्र में

उसको मायामयी धागा लुभाता है

उसे जानना होगा

अनभिज्ञता में डूबा हुआ मोती

वास्तव में हीरा है!


_महिमा ठाकुर

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