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वो प्यार में पड़ने वाला लड़का नहीं था ..

AnkswritesAnkswrites March 11, 2022
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मैं अपनी नब्जों से लहू निकाल कर

अपनी नज्मों में भरता चला गया.. 


मंजिल को पाने के खातिर मैं

अपनों से ही बिछड़ता चला गया..


मुझे सफ़र में अब तक जो भी मिला हैं

उन सारे अजनबियों को अपनाता चला गया..


हर किसी ने की मेरे सामने उसी का ज़िक्र

हर शख़्स मेरे जख्मों को कुरेदता चला गया..


सुन सान रास्ते से आ जाती हैं आवाज़ें तेरी

कुछ यूं ही मुझ को तन्हाई सताता चला गया..


दो चार किस्से सुना कर अपने प्रेम की मैंने

इस दौर के लड़को को कायल बनाता चला गया..


वो प्यार में पड़ने वाला लड़का नहीं था 

हर कोई प्रेम को बुरा बताता चला गया..


मैं सर्दी की चांद रातों में बैठ कर 

एक ग़ज़ल लिखता चला गया..


मैं ' जॉन ' का आशिक़ हूं बस

इसी लिए मूंह से ज़हर उगलता चला गया..


मुझे अब किसी से सहारे की उम्मीद नहीं

मैं ख़ुद से ही ख़ुद को संभालता चला गया..


मेरी फ़ुगां पर किसी ने ध्यान नहीं दिया जब से

मैं ख़ुद से अपने ज़ख्मों को सिता चला गया..


जब से अपने नज़र अंदाज़ कर ने लगे हम को

अपने ही लिखें गीतों को गुन गुनाता चला गया..



जिस को लाखों ने मिल कर चुना था

वैसा हर एक शख़्स बिकता चला गया..


मैं किसी कि बातों को अब दिल से नहीं लगाता

सारे लोगों कि गलतियां को भूलाता चला गया..


समझदार हैं वो लोग जो इश्क़ से किनारा कर लेते हैं

आने वाली पीढ़ीयों को ये बात बताता चला गया..


जब से हमें खुद से प्यार हुआ

मैं सभी से झगड़ता चला गया..


दरख्तों के छांव में बैठे हुए लोग 

धूप में काम करते हुए को सीखा कर चला गया..


जाने वालों को भला रोक सका हैं कोई

जो भी आए बस हाथ हिला कर चला गया..


किसी के लिए दुनिया न छोड़ना 'अंकित '

हमें एक शख्स समझा कर चला गया..

   फ़ुगां - दर्द भरी पुकार

© Ankswrites

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