कोई गिला नहीं हैं तुमसे's image
Valentines PoetryPoetry1 min read

कोई गिला नहीं हैं तुमसे

AnkswritesAnkswrites February 5, 2022
Share0 Bookmarks 18 Reads1 Likes

तुम्हारी हर एक बात पर एतबार करता हूं मैं

हां अभी भी सिर्फ़ तुमसे प्यार करता हूं मैं




तुम मेरे मुक़द्दर में नहीं कि मिलो मुझे

अपनी सफ़ीना के तहरीर में साथ लिखता हूं मैं




अपने उल्फ़त के किस्सों से निकला नहीं हूं मैं,

तुम गुज़र गए हो लेकिन अभी भी वहीं हूं मैं..




मैंने चंद देर के लिए आँखें क्या बंद कि मरहूम समझ लिया

अरे आ के देख जाओ मेरे मुक़ाबिल अभी ज़िन्दा हूं मैं..




चलो अब जाओ भी कोई गिला नहीं हैं तुमसे

जो गलती मैंने गलती से कि उसके लिए मा'ज़रत चाहता हूं मैं..




काश तुमने जैसा था वैसे ही तसलीम कर लेती,

तुम्हारे लिए बदलते बदलते पता चल रहा हैं कि कौन हूं मैं.




No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts