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Romantic PoetryPoetry2 min read

इतना दर्द भरा था वो लहज़ा

AnkswritesAnkswrites February 23, 2022
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इतना दर्द भरा था वो लहज़ा कि 

सुन कर ही आह निकल जाते हैं..


जो ताउम्र साथ निभाने का वादा करते हैं 

पता नहीं वो कब आगे निकल जाते है..


कुछ शेरों से मेरा दर्द बयां नहीं होगा

हमारे दिल से गज़लें निकल जाते हैं..


उसके पयाम का इंतजार करते - करते

ख़बर नहीं लगता कि कब दिन निकल जाते हैं..


कितने महरूम हैं वो लोग जो तूझे

नज़र अंदाज़ कर के निकल जाते हैं..


मैं मुंतजिर हूं कि वो गुज़रें कभी इस राह से

और वो हैं कि किसी और राह से निकल जाते हैं..


हम जब भी उसकी गली में सैर पर जाते हैं

उसके घर के नीचे से आहिस्ता से निकल जाते हैं..


दिन भर में सोच कर रखते हैं हम बातें कई 

जब उससे बात होती हैं तो सब भूल जाते हैं..


इतना भी मत उस सोच के बारे में ' अंकित '

पता नहीं चलता कि कब कौन शख्स बदल जाते हैं..


मुझे नहीं हुआ मालूम कि वो कौन लोग हैं

जो मोहब्बत कर के भी संभल जाते हैं..


बहरहाल उसे पाने कि ख्वाहिश रखते हैं हम

और वो किसी दूसरे की बातों में बहल जाते हैं..


हम भूलना चाहें भी तो उसे भुला नहीं सकते

यूं ही बैठे -बैठे उसके ख्याल आ जाते हैं..



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