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एक चाँद की तलाश है

LonelyMusafirLonelyMusafir March 22, 2022
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दर्द के सियाह में, कुछ ख्वाहिशों की लाश है।

ग़म मिटाने के लिए, एक चाँद की तलाश है।


वो चेहरे बैठे ढांक के, था जिनसे मेरा वासता।

हो सच में एक सहारा जो, उस शख्स की तलाश है।


वो जिसका होने से मुझे, होने का गुमान हो।

वो हमसफर वो अहल-ए-दिल, उस साथ की तलाश है। 


मैं जानता नहीं मुझे, मैं खुद हूँ खुद से अजनबी।

वजूद में खुदी के अब, खुद की भी तलाश है। 


क्यों मन्द है ये धड़कने, क्यों द्वंद सा मचा हुआ।

दे दिल को जो तसल्ली उस, सुकून की तालाश है।


उलझे से ये धागे कुछ, हथेलियों को जकड़े हैं।

गिरह जो सारी खोल दे, उस हाथ की तलाश है। 


सांझ की ये चीख है, या दिल की है सिसकियाँ।

दबा दे हर आवाज़ को, उस शोर की तलाश है।


न मिल सका मुझे कभी, मैं ढूंढता सा थक गया।

था जिसकी मैं तलाश में, उस तलाश की तलाश है।

मुसाफिर


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