“शिकायत किससे करें”'s image
Poetry3 min read

“शिकायत किससे करें”

Lalit SarswatLalit Sarswat November 18, 2022
Share0 Bookmarks 19 Reads0 Likes

शिकायत किससे करें


जब डोर जोड़ ली दिल से दिल की

परवाह किसी और की आख़िर क्यूँ करें,

साथ भले छोड़ दे ज़माना हमारा

तुमसे दूरी की परवाह हम क्यूँ करें,

है मालूम कितने अज़ीज़ हो हमारे लिए

फिर ज़िंदगी से इतना प्यार अब क्यूँ करें,

मनानाशरमानाया दफ़्न हो जाना,

तुम्हारे अलावा यह शिकायत किससे करें।


जब तस्वीर छुपा रखी है तेरी दिल में

अब तुम्हें भूल जाने की वज़ह क्या रखें,

बेलगाम हो रहा अब यह इश्क़ मेरा

तुमसे दूर रहने की हिमाक़त कैसे करें,

मेरे लहू का हर कतरा तेरा नाम लिखे

ऐसी मोहब्बत को क़ैद अब कैसे करें,

दूरीअश्क़रंजतड़प मेरी रूह की

तुम्हारे अलावा यह शिकायत किससे करें। 


तस्सवुर रहता अब ख़्यालों में बस तेरा

अकेलेपन से ख़ामख़ा अब क्यूँ डरें,

मालूम है तेरी राहें मेरी और चली आती है

तुमसे बिछड़ने का ग़म अब क्यूँ करें,

तक़दीर जोड़ ली तुमसे ना जाने कब से

अब तक़दीर के हवाले ख़ुद को कैसे करें,

ज़िल्लततोहमतज़माने के असलहा 

तुम्हारे अलावा यह शिकायत किससे करें।


हिज्र से तौबा कर ली जब से तेरे हुए

ग़ैर-मौताद तेरे इश्क़ से अब कैसे करें,

मुफ़लिस बन गए सब कुछ दे तुम्हें अब

इन फ़िज़ाओं से अब इतना क्यूँ डरें,

अक़्स छिपा लिया ज़माने से तेरे ख़ातिर

अब तड़प तेरी आँखों की क्यूँ बनें,

नज़रानाज़ामे इश्क़ मंज़र एक तेरा

तुम्हारे अलावा यह शिकायत किससे करें।


मौसिकी और ग़ज़ल सब तेरे नाम लिखे

किसी और हुस्न की तारीफ़ कैसे करें,

मेरे अल्फ़ाज़ मेरी नज़्म तेरा ज़िक्र करे

किसी और तरन्नुम की तारीफ़ कैसे बनें,

हो चाहे मेले-बाज़ार या किसी महफ़िल में

परवाना शमा से ख़ुद को दूर कैसे रखे,

शुमालजनुबमश्रिकमगरिबसब तुम

तुम्हारे अलावा यह शिकायत किससे करें।


सुनोनींद कर तो दी नाम तेरे वसीयत में

अब इन ख़्वाबों को तेरे नाम कैसे करें,

ज़िस्म  जान भी रख दी गिरवी पास तेरे

अब इस रूह को तेरे नाम कैसे करें,

पहचान बना दी इकलौती तुम्हें अपनी

तेरी ख़ुदाई को भूलने की जुर्रत कैसे करें,

इबादतशोहरतज़मानत सब तुम मेरे

तुम्हारे अलावा यह शिकायत किससे करें।


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts