“शब्द”'s image
Share0 Bookmarks 29 Reads0 Likes

शब्द


वाणी से प्रेषित होते

मन के जो बोल

कभी शून्य कभी पूर्ण

संवाद अनमोल

आज प्रस्तुत कर रहा

शब्दों का वो कोष। 


भाषा हो किंचित कोई

भाव समेटे चाहे कोई

शब्दों का आवाहन कर

जीवन को 

निस्तारित करते

हृदय के वचनों को पिरो

शब्दों की माला बुनते। 


शब्द दिखाते

प्रतिबिम्ब हृदय का

मानव के भावों का

रिश्तों के प्रभावों का

सामाजिक सद्भावों का

और हो बनफूल 

श्रिंगार करते

कवियों की वाणी का।


वेदपुराणग्रंथ बने जिनसे

बड़े बड़े नाम बने जिनसे

यह वही शब्द हैं हे प्रिये

बने मधुर राग जिनसे। 


शब्दों की कपोलें कच्ची

पर भावना सदा रहे सच्ची

रहते औत प्रोत 

हृदय के उद्गारों से

कभी सरल कभी कठीन

उद्वेग भरे विचारों से। 


द्वेषरागरोषप्रतिशोध

अज्ञानतासंज्ञानता

का ना रहे कभी बोध

कभी प्रेमकभी करुणा

कभी संघारकभी रचना,

रहे समाहित सभी इनमें

कैसी यह प्रभु की संरचना

कभी भक्तिकभी शक्ति,

कभी मिलापकभी आलाप,

कभी रुदनयह कैसा प्रलाप,

कभी लिए अमृत निज में

कभी समाहित हाला इनमें

जिनका ना औरना छौर,

व्याख्या के नहीं और बोल।


शब्द वाणी के आकार

कभी सार्थककभी निरर्थक,

मानव की संवेदनाओं के 

मूलभूत आधार

लिए आकृति निराकार। 


शब्दों का मोल करे जो

मानव वही साकार

शब्द करते कभी कभी

हृदयभेद प्रतिघात

शब्द बनाते वाणों को तिक्षण

कभी व्यंग्यकभी तंज प्रतिक्षण

इनको तरकश में रखो

जिंहवा को नियंत्रण में रखो

जितना आव्यशक

उतना ही उपयोग करो

और ले निसवार्थ भावना

मानवता को प्रेषित करो

प्रभु के बनाए शब्द-वचन का

जीवन में अनुसरण करो

और एक सभ्य सशक्त समाज का

देशहित में उदीयमान करो।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts