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परदेसी


हैं दूर कहीं एक जहां में

निभाते फ़र्ज़ अपने

अरमानों को दिल में दबा

करने पूरे अपनों के सपनें

हम मज़दूर,

हम परदेसीमज़्बूर। 


आंसुओं को छिपा अपनों से

विदा ले रहे घरों से

सीने लगा एक और बार

कोई रोक ले हमें

आवाज़ दी माँ-बाप ने

की बच्चेरुक जा एक बार

फिर से सोच ले

यूँ ना जा हमें छोड़ कर

दिलों को यूँ तोड़कर

काम मिल ही जाएगा कोई

बड़ा या छोटा

बस रुक जा बीच हमारे

ना जा साथ छोड़

पैसे लेना यहीं कुछ जोड़

रूखी-सुखी में जी लेंगें

सपनों को दिल में भींच लेंगें

बस एक बार बात सुन ले

ना दूर देश की राह ले। 


रोका बहन-भाई ने बाँह पकड़

गले से कुछ यूँ लिपटकर

कहा भाई आपके बिना 

कैसे हंसी-ख़ुशी जीना

माँग अपनी किसे कहेगें

राखी कैसे तेरी कलाई पर कसेगें

अपनी छोटी-मोटी ख्वाहिशें

बिन तेरे पूरी कैसे करेंगे

डाँट पड़ने से अब कैसे बचेगें

आपके प्यार को अब तरसेगें। 


समझाया सबको 

दिल पर भारी पत्थर रख

अपने आंसुओं को

दूर कहीं ताक पर रख

की ज़िम्मेदारियाँ हैं बहुत

कंधा अकेला हूँ सबका

सपना सुनहरा हूँ सबका

क़ुर्बानी मेरी दे रहा

दूर सब से अब जा रहा

ताकि खुश रहो आप सब

सुख मिले जहां का सब 

किसी के सपने ना छूटेंगे

किसी के अरमान ना टूटेगें। 


बस एक काम करना

आशीर्वाद मेरे सर पर रखना

यादें मेरी दिलों में रखना

ख़ुशी अपने चेहरे पर रखना

दुःख-दर्द से दूर ही रहना

सपने सब अपने पूरे करना

औरमेरी फ़िक्र ना रखना

ख़तों में मुझे याद करना

बातों में मुझे याद करना

एक दिन लौट आऊँगा

तुम सबके के पास

रख लेना बांध मुझे

अपने घर में ही 

फिर कभी ना जाने देना। 


बस आज जाने दो

सपने सबके तक रहे राह मेरी

ज़िंदगी नई इंतेज़ार कर रही

सबको अपने दिल में रखूँगा

यादें सबकी नींदों में रखूँगा

और लौट आऊँगा बहुत जल्द

सबके पास

बस अभी जाने दो

मज़्बूर हूँ!

परदेसी होने जा रहा हूँ,

मज़्बूर हूँ। 

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