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Romantic PoetryStory1 min read

हम डरते हैं बदनाम हो जाने से जरा

LALBAHADURLALBAHADUR January 20, 2022
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हमें प्यार की भाषा नहीं आती अजनबी,

यूँ आँखों से ये बातें बनाया न कीजिए,,


ज़रा नादान हैं हम अभी इश्क़ में सनम,

यूँ सबक इश्क़ के हमें पढ़ाया न कीजिए,,


न रोका कीजिए हमें राहों में इस तरह,

यूँ पकड़ के हाथ हमें सताया न कीजिए,,


पत्थरों के हैं मौसम काँच के हैं रास्ते,

ख़्वाबों के इस शहर में ले जाया न कीजिए,,


"सागर" तुम्हारा है...तो...तुम्हारा ही रहेगा,

यूँ मुहब्बत को सरे-आम दिखाया न कीजिए,,


न कीजिए तारीफ हर बात में हमारी,

महफ़िलों में ग़ज़लें मेरी गाया न कीजिए,,


होता है जिक्र साथ जो तुम्हारा और मेरा,

बेहताशा इस कदर मुस्कुराया न कीजिए,,


सुना मैनें पूछते हैं सब आपसे नाम हमारा,

गुजारिश है साहिब किसी से बताया न कीजिए,,


हम डरते हैं बदनाम हो जाने से जरा,

मगर गुमनाम भी हमें बताया न कीजिए,,

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