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चलने दो " सज़दा " इश्क़ का सिलसिला

LALBAHADURLALBAHADUR January 23, 2022
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चलने दो " सज़दा " .... सिलसिला दिल्लगी का

इश्क़ ,, कोई मन्नत नहीं ,, जो मुकम्मल हो जाए ...


मैं तिनकों का दामन पकड़ता नहीं हूँ

मोहब्बत में डूबा तो कैसा सहारा


✍️✍️राइटर l.b. MP 53✍️✍️


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